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Showing posts from August, 2021

दृढ़ विश्वास और अटल श्रद्धा

 #दृढ़_विश्वास #अटल_श्रद्धा आज का ब्लॉग दृढ़ विश्वास की कमी मनुष्य के लिए बहुत घातक होती है, यही वो कमी है जो उसे आस्था, धर्म, इष्ट आराध्य और कर्तव्यपथ से विमुख कर अंधविश्वास, पाखण्ड, निराशा और पतन की तरफ ले जाती है।  सनातन संस्कृति में दृढ़ विश्वास के अनेकों उदाहरण स्पष्ट है, बालक ध्रुव को विश्वास है कि भगवान उसे पिता की गोद में बैठने का अधिकार देंगे..., भक्त प्रह्लाद निश्चिंत है कि उसे प्रभु ही  बचाएंगे, शिलावत सती अहिल्या और माता शबरी आश्वस्त है कि उनके श्रीराम आएंगे, द्रौपदी जानती थी कि पंच महारथियों की पत्नी होने के बाद भी यदि वस्त्र और मर्यादा का हरण हो रहा है तो श्रीकृष्ण अवश्य अपना वचन निभाएंगे। और ये सब उदाहरण युगों युगों के लिए अमर हो गए केवल दृढ़ विश्वास और अगाध श्रद्धा के बल पर.....क्योकि यह अटूट विश्वास ही श्रद्धा को जन्म देता है।  हम मनुष्यों को भगवान ने स्वयं श्री गीताजी में वचन दिया है  " यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।"...

भागता मोमिन एक सुखद अनुभूति

 आज मुझे अफगानिस्तान से वहाँ के नागरिकों को भागते हुए देखकर खुशी हो रही है, इसका अर्थ यह नही की मेरी मानवता मर गई है.....नही...!  मेरी मानवता कभी मर नही सकती क्योंकि मैं अखिल विश्व को अपना परिवार मानने वाली सनातन संस्कृति का एक अभिन्न अंग हूँ।  मेरी खुशी में भी आँसू छिपे हुए हैं मेरे उन महान पूर्वजों की याद के जो कभी आर्यान, गन्धार, हिंदुकुश, सिंध, बलोचिस्तान, मुल्तान, रावलपिंडी, कराँची, लाहौर, ढाका, कम्बोडिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जावा, सुमात्रा आदि स्थानों पर शांति से रहकर जीवन को विश्व कल्याण हेतु आहूत कर रहे थे। एक बर्बर अरबी कबीलाई कौम ने 1400 वर्ष पूर्व रेगिस्तान से जब यह ऐलान किया कि "उनके अलावा शेष सब काफ़िर है उन्हें मोमिन बनाओ या मार डालो, यह धरती हमारी है इसे दारुल हरब से दारुल इस्लाम में परिवर्तित करो.." तब से उस जेहादी मानसिकता ने जगह-जगह से गैर मुस्लिम धर्म वालों को तलवार से मौत के घाट उतारा..... उन्हें अपनी पुरखों की महान आर्य संस्कृति से विच्छेदन कर बलात म्लेच्छ बनाया...... उन वीरों से हमारे धर्म के विपरीत काम करवाकर विभाजित किया.....। हमारें लाखों मन्दिर, ...

अफगानिस्तान - एक चिन्तनीय प्रश्न

विषय आज के अफगानिस्तान का है...... गौतम बुद्ध द्वारा प्रतिपादित अहिंसा हाथ बांधकर बन्दूक की नोक पर मौन बैठी है। शान्ति दूर किसी कोने में मृतप्रायः पड़ी है तथा आतंक अट्ठहास कर रहा है। तथागत के महानिर्वाण के बाद दिग्भ्रमित बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने आर्यभूमि की तलवार की धार को भोथरा कर दिया। बड़े-बड़े वीर सम्राटों को क्षात्र धर्म से च्युत कर भिक्षु की भूमिका में बदल दिया। परिणाम..... भारत भूमि पर जो वीरता और अखंडता का भाव चाणक्य ने जनमानस में प्रकट कर इसकी सुरक्षा सुदृढ की थी वो दीवार दरक गई। शांति और अहिंसा कायरता में परिणित हो गई। पूज्य आद्य शंकराचार्य जी ने दैहिक भोगविलास में डूबे बौद्ध भिक्षुओं को शास्त्रात में पराजित कर उन्हें पुनः वैदिक परंपरा में समाहित किया। भारत के बाहर यह मत स्वीकृत इसलिए हुआ क्योंकि उन लोगों के मूल में कोई स्थापित संस्कृति के कोई अंश नही थे उन्हें यह सुगम लगा और पूर्णता की खोज का परिणाम समझ इसे आत्मसात किया। कनिष्क का उपगणस्थान भी बौद्ध मतावलंबियों का क्षेत्र रहा है, पर उसके मूल में सनातन वैदिक धर्म स्पष्ट था। शक कनिष्क भारत के महानतम राजाओं में प्रतिष्ठित ह...

अखण्ड भारत और विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस

 #विभाजन_विभीषिका_स्मृति_दिवस  #अखण्ड_भारत_स्मृति_दिवस  1947 में भारतवर्ष का विभाजन विश्व इतिहास की सबसे रक्तरंजित घटना थी। मुगलों के आगमन के समय जो भारत 1 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तारित था वो 14 अगस्त 1947 के त्रासदीपूर्ण, अनियोजित, अस्वीकार्य दो राष्ट्र में बदलने के गोरे और काले अंग्रेजों के कपटपूर्ण निर्णय के बाद मात्र 33 हजार वर्ग किलोमीटर का इंडिया मात्र रह गया।  जिसे गाँधी जी ने 'अपनी लाश पर होना कहा था...', जिसे नेहरू ने अपनी सत्ता भोग की लालसा के चलते 'नियति से मुलाकात कहा था' जिसे जिन्ना ने 'मात्र शुरूआत है...' कहकर भविष्य की योजना बता दी थी और जिसे हिंगलाज से ढाकेश्वरी तक के भक्तों ने, हिन्द की संतानों ने कहर की तरह झेला था..." उस जेहादी योजना की सफल परिणीति को लॉर्ड माउंटबेटन के ख़ुशामदिदो ने हमारी आगामी पीढ़ियों से छुपाने का षड्यंत्र भी आजादी के पश्चात रचा। अपने पाकिस्तान न जा पाने की मजबूरी को जिस मौलाना आजाद ने बार-बार भुनाकर वाहवाहियां लूटी और सत्ता भोगी उसी ने नेहरू और वामपंथियों के इशारों पर भारत के शिक्षा मंत्री रहते ...