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भागता मोमिन एक सुखद अनुभूति

 आज मुझे अफगानिस्तान से वहाँ के नागरिकों को भागते हुए देखकर खुशी हो रही है, इसका अर्थ यह नही की मेरी मानवता मर गई है.....नही...! 

मेरी मानवता कभी मर नही सकती क्योंकि मैं अखिल विश्व को अपना परिवार मानने वाली सनातन संस्कृति का एक अभिन्न अंग हूँ। 


मेरी खुशी में भी आँसू छिपे हुए हैं मेरे उन महान पूर्वजों की याद के जो कभी आर्यान, गन्धार, हिंदुकुश, सिंध, बलोचिस्तान, मुल्तान, रावलपिंडी, कराँची, लाहौर, ढाका, कम्बोडिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जावा, सुमात्रा आदि स्थानों पर शांति से रहकर जीवन को विश्व कल्याण हेतु आहूत कर रहे थे।


एक बर्बर अरबी कबीलाई कौम ने 1400 वर्ष पूर्व रेगिस्तान से जब यह ऐलान किया कि "उनके अलावा शेष सब काफ़िर है उन्हें मोमिन बनाओ या मार डालो, यह धरती हमारी है इसे दारुल हरब से दारुल इस्लाम में परिवर्तित करो.."


तब से उस जेहादी मानसिकता ने जगह-जगह से गैर मुस्लिम धर्म वालों को तलवार से मौत के घाट उतारा..... उन्हें अपनी पुरखों की महान आर्य संस्कृति से विच्छेदन कर बलात म्लेच्छ बनाया...... उन वीरों से हमारे धर्म के विपरीत काम करवाकर विभाजित किया.....।


हमारें लाखों मन्दिर, गुरुकुल ध्वस्त किए, हमारी शिक्षा व्यवस्था चौपट की.....। हमारे विश्वविद्यालय, पुस्तकालय व सांस्कृतिक स्थलों को जलाया, नष्ट किया....।

भारतवर्ष की भौगोलिक सीमाओं को छोटा किया तब उस आतंक से पीड़ित हमारे हिन्दू पुरखे इसी तरह अपनी जमीन से रोते बिलखते खदेड़े गए थे....महिलाओं की इज्जत नीलाम की गई थी....हमारे बच्चों की जबरन सुन्नत की गई थी।


आज वहीं स्थिति तुम्हारे साथ बनी है, मारने वाले तालिबानी तुम्हारे ही मोमिन भाई है, शरिया और शरीयत भी तुम्हारी ही देन है फिर ...क्यों भाग रहे हो....?

खुशियाँ मनाओ न...अब दारुल इस्लाम व शरिया का राज होगा....... । यही तो तुम चाहते हो न...पूरे संसार में....।

ईसे कहते है मौत का भय....


हमारा हिन्दू पुजारी मरने से नही डरा वो अपने भगवान को छोड़कर नही जाएगा...और भगवान के प्रति हमारी इसी आस्था और विश्वास ने तुम्हारी शताब्दियों की कोशिश के बावजूद भी  भारत में कभी भी पूर्ण जिहादी राज कायम नही होने दिया... यहाँ की कोख सदैव वीर प्रसूता रही है और रहेगी भी...।


रुको न....अरे कम से कम हवाई जहाज और बस का फर्क तो समझो.... देखों ऐसे लटको मत गिर जाओगे तो कयामत तक इंतजार करना पड़ेगा.....!


अब्दुल रहीम खान कहते थे....

".....देखि दिनन के फेर...


@ ©️ नरेश बोहरा 'नरेन्द्र'  

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