आजकल पंजाब के विभिन्न हिस्सों में यह एक आम दृश्य है की सड़कों पर पंजाब की परम्परागत वेशभूषा पहने महिलाएँ व पुरुष राहगीरों, गरीबों, मजदूरों, झुग्गियों आदि में रहने वालों को भोजन बांटते है जिसे ये लोग 'लंगर' कहते है, विशेषकर कोरोना आपदा काल में यह बहुत बड़े अभियान के तहत किया गया, नाम से यह लंगर है जिसे हम लोग प्रसाद समझकर ग्रहण करते रहे है परंतु यह एक प्रकार का विष है जो अमृत पुत्रों को पिलाया जा रहा है।
यह वो लंगर नही है जिसे प्रातः स्मरणीय गुरु नानक देवजी महाराज ने "वंड चख.." कहा था, यह वो भी नही है जो ऋषियों की भूमि पंजाब में पीढ़ियों से "एक संगत-एक पंगत" के भाव से संचालित हो रहा है।
आज पंजाब का भयानक रूप से ईसाईकरण हो रहा है, अमृत धारी अनेकों सिख व हिन्दू बड़े स्तर पर पादरियों के भृमजाल में फंसकर धर्म बदल चुके है, गरीब और वंचित लोग जीवन में बड़े बदलाव आने व थोड़े प्रलोभनों की लालसा में आकर महान ऋषि व गुरु परम्परा को भूलते जा रहे है। पंजाब एक ओंकार से मसीह के आमीन की तरफ बढ़ रहा है।
आप इन दृश्यों को देखिए....सरदारों के परम्परागत पहनावे में खडे लोग भोजन वितरण कर रहे है, भोजन पात्रों पर पर ईसाइयों का क्रॉस चिन्ह अंकित है..... और इसे मसीह की कृपा का प्रसाद बताया जा रहा है। मुट्ठी भर अनाज के लिए आज पूर्वजों की थाती व संस्कृति को त्यागकर पंजाब का बड़ा जनमानस हमसे दूर हो रहा है। गाँव-गाँव में कुकुरमुत्तों की तरह छोटे-बड़े चर्च उग आए है।
पंजाब में चाहे किसी भी दल की सरकार रही हो उनका इन मिशनरियों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग व समर्थन सदैव रहा है क्योकि कुल 32% हिन्दू-सिख दलित आबादी जिसमे अधिकांश मजहबी सिख और वाल्मीकि हिन्दू है का आधा हिस्सा धर्मांतरित हो चुका है और उस वोट बैंक के ठेकेदारों की सरकार में , सभी दलों में गहरी घुसपैठ है।
खेद है कि गुरुद्वारों के माध्यम से भी इस मतांतरण को रोकने हेतु कोई बड़े प्रयास नही हो रहे है। सिख समाज की सर्वोच्च संस्था SGPC की नजर में तो ऐसा कुछ हो ही नही रहा है यह तो संघ का षड्यंत्र मात्र है और वह पूरी ताकत से पंजाब में संघ के बढ़ते प्रभाव को रोकने में लगी हुई है। सिख समाज में जातिवाद भयंकर स्तर पर है, एक संगत-एक पंगत की परम्परा अवसान पर है, गरीब और दलित सिख भाइयों जिन्हें दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंदसिंह जी महाराज ने ..'रँगरेटे गुरु के बेटे ' कहा था उनको यह तथाकथित कुलीन सिख अपना मानते ही नही है और न ही गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की करोड़ो की कमाई से इनके कल्याण और उत्थान हेतु कोई बड़ा कार्य किया जा रहा है। साथ ही विदेशों में बसा अधिकतर सिख समाज भी अपने भाइयों की इस दुर्दशा पर मौन है....यह पीड़ादायक है।
इसी कारण अपने गुरु के द्वारे से दुत्कारा हुआ, मजबूर, हताश, दुःखी और निर्बल गुरु पुत्र जब आँखों मे आँसू भरकर लौटता है तो मगरमच्छ की तरह लपकने व निगलने को ततपर ये ईसाई संस्थाएं, पादरी, पास्टर उन्हें तात्कालिक सुविधाएँ प्रदान कर हमदर्दी जताते है तथा और भी प्रलोभन प्रदान करते है, मजबूर गुरुपुत्र अपने पूज्य 'दशमेश पिता' को भूलकर मसीही फादर की गोद में बैठ जाता है, क्योकि इसके अलावा उसे उस समय कोई सूझता ही नही न कोई राह दिखती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद, राष्ट्रीय सिख संगत सहित अन्य राष्ट्रवादी धार्मिक संगठन इस विषय पर वर्षों से धरातल पर कार्य कर रहे है तथा मतान्तरित बन्धुओं की पुनः घर वापसी करवा रहे है साथ ही उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए भी सार्थक प्रयास कर रहे है। उन्हें और गति देने की आवश्यकता है।
पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान के कुछ जिलों की स्थिति बहुत सोचनीय व चिंताजनक है। यहाँ मिशनरियों की सक्रियता बहुत ज्यादा है, वर्तमान में जिस प्रकार की सरकार पंजाब में सत्तासीन है तथा राष्ट्रद्रोहियों, खलिस्तानियों को प्रश्रय मिल रहा है, कानून व्यवस्था पंगु हो रही है, नशे की जकड़ में युवापीढ़ी फंसी है, यह एक गम्भीर राष्ट्रीय संकट का विषय है।
पाकिस्तान की सीमा पर बसे प्रदेश में हो रहा यह मतांतरण का कार्य गम्भीर रूप से राष्ट्रान्तरण का षड्यंत्र है, इसमें विदेशी भारत विरोधी संस्थाएं मुँहमाँगा धन व संसाधन उपलब्ध करवा रही है, केंद्र सरकार को इस पर कोई कठोर कदम उठाकर ईसायत के जाल को फैलने से रोकना होगा साथ ही सभी सनातनी राष्ट्रवादियों को इस पर गम्भीर चिंतन मनन करना होगा।
✒️ नरेश बोहरा 'नरेन्द्र'
प्रान्त सह प्रचार प्रमुख विहिप जोधपुर
जय श्री राम सही बात है भाई सहाब
ReplyDeleteअति गंभीर विषय पर प्रकाश डाला है।
ReplyDeleteसुंदर।
सटीक लिखा आपने पंजाब की वर्तमान राजनीति आशीर्वाद इन पर बना हुआ इसलिए बिना कोई भय यह अपना काम तेजी से कर रहे है
ReplyDeleteजय श्री राम भाई साहब 🙏 सही कहा आपने
ReplyDelete