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Showing posts from June, 2021

जो लाक्षा-गृह में जलते हैं.......

अंततः वही हुआ जो सत्ता के मदान्ध नेतृत्व के मन में तय था....। जयपुर ग्रेटर नगर निगम भ्र् ष्टाचार प्रकरण में वायरल हुए वीडियो को आधार बनाकर पूर्व नियोजित रूप से राजस्थान की एसीबी ने बिना किसी ठोस आधार के संघ के क्षेत्रीय प्रचारक जी को भी आरोपी बना लिया। कथित वीडियो में दिखाई मात्र दे रहे आदरणीय निम्बाराम जी भाई साहब को अन्य आरोपियों के समकक्ष मानकर राजस्थान की अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉंग्रेस सरकार ने अपनी उसी कुत्सित मानसिकता का परिचय दिया है जो कभी उनके पूर्वर्ती राष्ट्रीय नेतृत्व की रही है।  संघ की स्थापना से अब तक 3 बार कॉंग्रेस की सरकारों ने इसे समाप्त करने की भावना से प्रतिबंधित करने का कार्य किया, प्रथम बार 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के झूठे आरोप में,  दूसरी बार 1975 मे आपातकाल में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के प्रयासों में भाग लेने हेतु और तीसरी बार 1992 में प्रभु श्री राम मंदिर निर्माण आंदोलन में सक्रियता व जनजागरण करने की बात पर.....। परिणाम क्या हुआ...?। संघ स्वर्ण की तरह इस विरोध की अग्नि में दग्ध होकर और अधिक निखर कर उभरा....विपक्षी और विरोधी हताश हुए....।...

सत्यमेव जयते - राजस्थान

अंततः वही हुआ जो सत्ता के मदान्ध नेतृत्व के मन में तय था....। जयपुर ग्रेटर नगर निगम भ्र् ष्टाचार प्रकरण में वायरल हुए वीडियो को आधार बनाकर पूर्व नियोजित रूप से राजस्थान की एसीबी ने बिना किसी ठोस आधार के संघ के क्षेत्रीय प्रचारक जी को भी आरोपी बना लिया। कथित वीडियो में दिखाई मात्र दे रहे आदरणीय निम्बाराम जी भाई साहब को अन्य आरोपियों के समकक्ष मानकर राजस्थान की अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉंग्रेस सरकार ने अपनी उसी कुत्सित मानसिकता का परिचय दिया है जो कभी उनके पूर्वर्ती राष्ट्रीय नेतृत्व की रही है।  सर्व विदित है कि अशोक गहलोत सत्ता के चिपकू नेता है, सोनिया गांधी और राहुल, प्रियंका की जी हजूरी करके वो इस तीसरी बार  मुख्यमंत्री बने है जबकि इस बार सम्पूर्ण परिश्रम किसी अन्य का था परन्तु गहलोत की चालाकी ने उनसे मुख्यमंत्री की कुर्सी सहित अन्य पद व सम्मान भी छीन लिए, आज वो राजनीतिक रूप से दर बदर है। विगत ढाई वर्षों के शासन में जितनी असफलताओं का, कुशासन का रिकॉर्ड राजस्थान में बना है वो एक लोकतांत्रिक त्रासदी है। कोरोना महामारी की पहली लहर में उससे  निपटने, कुशल आपदा प्रबंधन में ...

कृषि और पशुपालन- भारतीय सन्दर्भ में

हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे बहारें हम को ढूँढेगी, न जाने हम कहाँ होंगे। लगभग यही कहा आज मुझे मेरे खेत में बकरियाँ चराने आये पशुपालक चरवाहों ने अपनी मातृभाषा में....... "की अब कौन इतने पशु पालेगा, रेवड रखेगा, नई पीढ़ी यह काम लगभग छोड़ चुकी है....." जब तक हम डाँग (लाठी), पोतिये (पगड़ी) वाले है तब तक यह है, बाद में आप इसे किताबों में पढोगे...."। रोजी-रोटी की खोज में दिसावर जाकर सेटल्ड हुई आज की पीढ़ी के लोग क्या यह कार्य कर सकते है...? उत्तर होगा... नहीँ। खेत की मेड़ के पेड़ काटकर हम लोग तारबन्दी करवा चुके है, क्योकि जंगली सूअर, नीलगायों व गाँवो के बेसहारा पशुओं से फसल की रक्षा जो करनी है। जंगल नष्ट करके हमनें बस्तियाँ बसा ली...., पारस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा गया, तेंदुए, भेड़िए व अन्य मांसभक्षी जानवर विलुप्ति की कगार पर आ गए और परिणाम यह कि सुवर, नीलगायों की सँख्या बढ़ गई वो अब गाँवों-खेतों की ओर रुख कर गए, भैस व जर्सी के अंधे मोह ने हमारी गौमाता को सड़क दिखा दी....! उसे बेसहारा कर दिया और नतीजन संकट मुड़कर फिर खेत और किसान पर ही आया जिससे हमें कँटीले तारों की बाड़ बनानी पड़...

महान हिन्दू संगठक-वीर महाराणा प्रताप

प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप सनातन धर्म व संस्कृति के रक्षक के रूप में एक ऐसा नाम जो युगों-युगों तक भारतवर्ष सहित विश्व के विभिन्न भागों में तब तक गूंजता रहेगा जब तक कि कोई भी व्यक्ति, सङ्गठन या देश अपनी राष्ट्रीय अस्मिता, धार्मिक स्वतंत्रता तथा स्वाभिमान की रक्षा व सम्मान हेतु लड़ता रहेगा।  भगवान श्री राम से भी पूर्व से चली आ रही सूर्यवंश की गौरवशाली क्षत्रिय परम्परा में विश्व के सबसे प्राचीन राज्य मेदपाट मेवाड़ जिसे पुरातन काल में चित्रकूट भी कहते थे उस चितौड़ की धरा के उज्ज्वल कीर्ति वाले राजवंश सिसोदिया कुल में जहाँ जन्मे महाराणा बप्पा रावल जिनके घोड़ों की टापों की गूंज आज भी हिंदुकुश के पर्वतों में आज भी गूंज रही है, जिनकी तलवार का स्वाद चखे म्लेच्छों के वंशज आज भी उनकी बसाई नगरी रावलपिंडी के नाम को बदलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए इन्ही के कुल में आगे महाराणा मोकल व कुम्भा, सांगा जैसे कुशल प्रजापालक, वीर व अद्वितीय योद्धा, महारानी पद्मावती व कर्मावती जैसी सती मातृशक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। वहीं वीर प्रसूता माता जयवंती बाई की कोख से पिता महाराणा उदयसिंह जी के "प्रताप...

गाय-आर्थिक आत्मनिर्भरता का द्वार

 #आत्मनिर्भर #भारत में गौमाता का बड़ा योगदान हो सकता है। #गौ माता की चिंता आवश्यक है। गौड़वाड़ सहित #पाली जिले में जो गौ बेसहारा घूम रही वो #भारत की सर्वश्रेष्ठ नस्लों में से एक काँकरेज है, कम पानी, भोजन और अन्य सुविधाओं के बाद भी वो एक सामान्य भेस से ज्यादा दूध दे सकती है, उनकी नस्ल सुधार कर संरक्षण व संवर्धन करना जरूरी है। आज #राजस्थान, #हरियाणा, #गुजरात #दिल्ली के कई युवा #काँकरेज, #थारपारकर , #राठी , #गिर , #साहीवाल आदि देशी गौवंश का संरक्षण कर लाखो रुपये कमा रहे है। काँकरेज में अभी इतना बिगाड़ा भी नही हुआ है, जल्दी ही अच्छे परिणाम आ सकते है। जिन भाइयों ने #भैंस पाल रखी है वो 1-2 गाय जरूर पाले भेस से ज्यादा दूध देगी बस कुछ तरीके अपनाने पड़ते है। आज गिर , थारपारकर की एक बछड़ी 30000 रुपये में मिलती है। गाँवों के जो #युवा #रोजगार की तलाश में है ओर उनके पास जमीन हो तो वो इन गाय को पालकर अपनी कमाई शुरू कर सकते है। देशी #गाय का दूध ही A2 है, बाकी भेस आदि का तो स्वास्थ्य के लिए भी खराब है, #होलिस्टन , #जर्सी आदि पशु तो गाय भी नही है, वो तो सुवर आदि जानवरों पर प्रयोग करके पैदा की गई है। #गोब...