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Showing posts from April, 2021

राजस्थान का शिक्षा विभाग-तुगलकी फरमानों का पिटारा

 और अंततः राजस्थान के शिक्षा विभाग से यह खबर आ गई कि 6,7,8,9,11 कक्षा के विद्यार्थी प्रमोट होंगे, 10 व 12 वी के परीक्षाओं की घोषणा बाद में होगी.....। प्रायोगिक होंगे और स्कूल बंद.....। यह हमारे मुखमन्तड़ि जी और ढोर_चरा जी के आदेश है। 9 वी तक कि तो कक्षाएं शहरी क्षेत्रों में पहले से ही बन्द है। कोरोना काल के बाद बड़ी मुश्किल से फरवरी में विद्यालय खुले थे, बच्चें, अभिभावक, शिक्षक सब प्रसन्न थे कि अब सब ठीक होगा। परन्तु दुर्भाग्य की हमारी लापरवाही और शासन की अक्षमता ने इस खुशी को लॉक कर दिया। कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा प्रयोग और तुगलकी आदेश शिक्षा विभाग को झेलने पड़े, हर बार नया आदेश, उस आदेश के ऊपर आदेश और फिर परिणाम यह कि किसी आदेश की ढंग से पालना नही हो पाई। अयोग्य शिक्षा मंत्री, बेलगाम अफसरशाही ने इस विभाग और यू कहे तो एक उद्योग के रूप में संचालित शिक्षण संस्थानों की कमर तोड़ दी है। क्योंकि सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों का वेतन तो जनता के टैक्स से भुगतान कर दिया जाएगा पर निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक, कर्मचारी, चपरासी, बाबू, ड्राइवर, वार्डन, आया और अन्य जिनका घर इस पर ही चलता है...

डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर - असतो मा सदगमय

भारतीय राजनीति में दो महापुरुषों का जीवन हमेशा चर्चित रहा, उनकों मानने और न मानने वाले, वैचारिक समर्थक या विरोधी दोनों ही प्रकृति के लोगों की संख्या आज भी बहुताधिक है और इसी कारण उनके वास्तविक जीवन दर्शन को राष्ट्रीय दृष्टिकोण में समझने के लिए लम्बा समय लग गया, वो है स्वातन्त्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर और बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर..।  राजनीति में हिन्दू राष्ट्रवाद के प्रस्तोता सावरकर जी सेक्युलरिज्म के ठेकेदारों को हजम नही हुए तो डॉ आंबेडकर जी जाती श्रेष्ठता के झंडाबरदारों को..। मध्यप्रदेश के महुँ में सूबेदार श्री रामजी सकपाल और भीमाबाई के घर बालक भीमराव का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ। अध्ययन में आ रही जातीय बाध्यता के कारण विद्यालय के ब्राह्मण शिक्षक केशव जी अम्बेडकर ने बालक भीमराव को अपना उपनाम प्रदान कर उन्हें पढ़ने का अवसर दिया। बचपन से अध्ययन प्रिय, मेधावी और कठोर परिश्रमी छात्र भीमराव ने 1912 में बीए करने के बाद बड़ौदा महाराज सयाजीराव गायकवाड़ द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति  से अमेरिका जाकर एम.ए. किया। 1916 में पीएचडी की तथा 1920 से 1923 तक लंदन में कानून की पढ़ाई...

भाजपा - दीपक जलने से लेकर कमल खिलने तक

     देश की स्वतंत्रता के पश्चात जब लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हुए उसमें जनता ने कॉंग्रेस को अपना भाग्यविधाता चुना क्योकि देश की आजादी के आंदोलन में उसका योगदान तथा महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू के प्रति विशेष श्रद्धाभाव के कारण उन्हें कॉंग्रेस पर पूर्ण विश्वास था कि वह ही भारत को हर मोर्चे पर अग्रगण्य रखेगी तथा देश का समुचित विकास कर जनआकांक्षाओं की पूर्ति कर सकती है। 1947 के बाद तथा प्रथम आम चुनावों से पूर्व ही देश के कुछ मूर्धन्य राजनेताओं को यह लगने लगा कि देश का नेतृत्व सिर्फ गोरे अंग्रेजों की कॉपी ही कर सकता है परन्तु उसके गौरवशाली अतीत, सांस्कृतिक विविधताओं, सनातन परम्पराओं तथा हिन्दू मानबिन्दुओं के संरक्षण के प्रति गम्भीरता नही दिखा सकता है और न ही विभाजन के तुरन्त बाद शुरू हुए कश्मीर मुद्दे, अनुच्छेद 370 सहित संविधान के हिन्दू कोड बिल पर अपनी कोई दूरगामी नीतियां बना सकता है, तब बंगाल के स्वतंत्रता सेनानी तत्कालीन उधोग मंत्री डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कॉंग्रेस के विकल्प के रूप में एक देशव्यापी राजनीतिक दल जिसका प्रमुख उद्देश्य भारतीयता को अक्षुण्ण रखना होगा के नि...

SGPC का संघ विरोधी प्रस्ताव

 #शिरोमणि_गुरुद्वारा_प्रबंधक_कमेटी ने अपनी बैठक में प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को #अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने तथा #हिन्दू राष्ट्र बनाने का कार्य कर रहा है जो स्वीकार नही है। इससे पूर्व भी अनेकों बार सिख समाज की इस सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने संघ के बारे में भ्रामक टिप्पणियां की है। पूज्य नवम गुरु तेगबहादुरजी का भी जिक्र किया कि उन्होंने इसी तरह की मानसिकता के विरुद्ध 17 वी सदी में अपना बलिदान दिया था। मामला सामान्य नही है, सिख समुदाय के धार्मिक विषयों पर इस संस्था को निर्णय लेने का अधिकार है मगर देश के सबसे बड़े राष्ट्रवादी सङ्गठन के बारे में उसे बोलने का कोई अधिकार नही है, वो भी उस सङ्गठन के बारे में जो सदैव सहजधारी और केशधारी बन्धुओं की एकता का पक्षधर रहा है, 84 के अमानुषिक नरसंहार के समय संघ ने सिख बन्धुओं को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है, आतंकवाद की आग में जलते पंजाब में सामुदायिक एकता व सद्भावना हेतु संघ ने बड़े-बड़े सन्तों की पदयात्राएं करवाई तथा सेवा कार्य किया है। आज लाख -लाख सिख बन्धु संघ के स्वयंसेवक के रूप में समाज जीवन के विभिन्न क...