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SGPC का संघ विरोधी प्रस्ताव

 #शिरोमणि_गुरुद्वारा_प्रबंधक_कमेटी ने अपनी बैठक में प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को #अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने तथा #हिन्दू राष्ट्र बनाने का कार्य कर रहा है जो स्वीकार नही है। इससे पूर्व भी अनेकों बार सिख समाज की इस सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने संघ के बारे में भ्रामक टिप्पणियां की है। पूज्य नवम गुरु तेगबहादुरजी का भी जिक्र किया कि उन्होंने इसी तरह की मानसिकता के विरुद्ध 17 वी सदी में अपना बलिदान दिया था। मामला सामान्य नही है, सिख समुदाय के धार्मिक विषयों पर इस संस्था को निर्णय लेने का अधिकार है मगर देश के सबसे बड़े राष्ट्रवादी सङ्गठन के बारे में उसे बोलने का कोई अधिकार नही है, वो भी उस सङ्गठन के बारे में जो सदैव सहजधारी और केशधारी बन्धुओं की एकता का पक्षधर रहा है, 84 के अमानुषिक नरसंहार के समय संघ ने सिख बन्धुओं को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है, आतंकवाद की आग में जलते पंजाब में सामुदायिक एकता व सद्भावना हेतु संघ ने बड़े-बड़े सन्तों की पदयात्राएं करवाई तथा सेवा कार्य किया है। आज लाख -लाख सिख बन्धु संघ के स्वयंसेवक के रूप में समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे है यह उनकी भावनाओं का भी अनादर है। खलिस्तान के समर्थक, देश तोड़ने वाली ताकते आज विदेशी फंडिंग के सहारे किसान आंदोलन की शह लेकर सिख समाज को गुमराह कर देश की मुख्यधारा से अलग करने में जुटे हुए है ऐसे में #SGPC का यह प्रस्ताव निराशा प्रदान करता है। आज #सिख समाज #पंजाब और #राजस्थान के #गंगानगर , हनुमानगढ़ आदि क्षेत्रों में धर्मांतरण की चपेट में है, युवा वर्ग नशे का आदि हो रहा है। बड़े पैमाने पर #ईसाई_मिशनरियों द्वारा गरीब सिखों का धर्मांतरण करवाया जा रहा है, उस पर यह संस्था मौन है, इसी संस्था के गढ़ #अमृतसर, #तरनतारन, आदि जगहों पर सैकड़ो केशधारी भाई अब #गुरुद्वारों के बजाय #चर्च जाने लगे गया है पर इस संस्था ने कोई कदम नही उठाया और कुछ प्रस्ताव नही लिया न ही रोजी रोटी को वंचित समाज बंधुओं की कोई सहायता की। #संघ का हमेशा से यह मानना है कि सिख और शेष हिन्दू सहोदर है उनमें कोई भेद नही है , यह एकता ही राष्ट्र की बड़ी ताकत है, सङ्गठन के सभी कार्यक्रमों में दशों पूज्य गुरुओं की गौरवगाथायें सगर्व सुनाई जाती है। समस्त हिन्दू समाज इन महान गुरुओं को देव तुल्य आदर प्रदान करता है उनके आगे मत्था टेकता है तथा गर्व अनुभव करता है। आज इस सौहार्द में खाई खोदी जा रही है, जिसकों अपने ही इस तरह की मानसिकता के लोग व संस्थाएं समर्थन दे रहे है जो विचारणीय और सभी के लिए गम्भीर चिंतनीय विषय है। मेरा देश के समस्त राष्ट्रवादी चिंतकों, सिख विद्वानों  से अनुरोध है कि इसे गम्भीरता से लेकर उचित मंच पर अपनी आवाज मुखर करे।

जय श्री राम। सत श्री अकाल।

@ नरेश बोहरा " #नरेन्द्र " (#नाड़ोल)

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