#बजरंग_दल_स्थापना_दिवस
बात 1989 की है, मेरे गाँव नाड़ोल में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु आरम्भ हुई श्रीराम शिला पूजन रथयात्रा का आगमन हुआ, सभी वरिष्ठ लोग वहाँ व्यवस्था में लगे हुए थे, हम बाल स्वयंसेवकों की टोली भी वहाँ यथायोग्य गिलहरी समर्पण करने हेतु अग्रपंक्ति में उपस्थित थी।
यथा समय रथयात्रा का आगमन हुआ, पूजन व पूज्य संतो का उद्बोधन हुआ, जय श्री राम के गगनभेदी उद्घोष में हम भी पूर्ण सहयोगी बने।
रथयात्रा के साथ बजरंग दल के तरूणों की एक टोली भी थी जो व्यवस्था संभालने व त्वरित कार्यवाही हेतु सचेत दृष्टि से नियुक्त थी, उनके कन्धों पर सुशोभित हो रहा "बजरंग दल राजस्थान" अंकित चर्म बैल्ट मेरे आकर्षण का केंद्र बन चुका था, रथयात्रा के प्रस्थान के समय आखिर उनमें से एक युवक के पास जाकर बाल सुलभ भाव से वो बेल्ट मांग ही लिया......!
आश्चर्यचकित उस युवक ने स्नेह भाव से सिर पर हाथ फेरकर गाल पर चिकोटी काटते हुए अगली बार आकर देने का वचन देकर विदा ले ली, कितने ही दिनों तक उस बेल्ट का स्वप्न आँखों में उमड़ता रहा, उन भैया जी के आने की प्रतीक्षा भी प्रबल रही पर पूर्ण नहीं हुई। समयानुसार सब सामान्य हो गया।
जून-जुलाई 2001 में नियमित स्वयंसेवक के रूप में संघ का नगर स्तर का दायित्व निर्वाह कर रहा था, एक दिन माननीय जिला प्रचारक जी ने पाली संघ कार्यालय में आयोजित एक बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया, नियत तिथि को सम्पन्न हुई बैठक में विश्व हिन्दू परिषद राजस्थान क्षेत्र के माननीय संगठन मंत्री, जोधपुर प्रान्त संगठन मंत्री, संघ के विभाग व जिला प्रचारक जी का मार्गदर्शन मिला व विभाग में विहिप/बजरंग दल के कार्य विस्तार की योजना बनाई, जिसमें कुछ वरिष्ठ व तरुण स्वयंसेवकों को इस कार्य हेतु नियत किया गया उनमें से एक मैं भी था......। सहसा वह बेल्ट स्मृतियों में जीवंत हो गया।
2001 में नगर संयोजक के रूप में संघ मंत्र को धारण कर आरम्भ हुई यह तीर्थयात्रा अनगिनत पड़ावों से निकली, संगठन के देवतुल्य वरिष्ठ पदाधिकारियों/मार्गदर्शकों, साथी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं, सुधीजनों का देवदुर्लभ सानिध्य, पथप्रदर्शन कुबेर प्रदत्त दिव्य निधि जैसा अमूल्य व जीवन भर सहेजने जैसी सम्पत्ति है।
नगर संयोजक से लेकर प्रखण्ड, जिला, विभाग व प्रान्त स्तर तक के दायित्व का निर्वहन करते हुए 20 वर्ष चली इस यात्रा में अनेकों राष्ट्रीय, प्रान्त, जिला स्तर के कार्यक्रम, बैठकें, आंदोलन आदि में कार्यकर्ता रूप में काम करने का, उससे संगठन कार्य की बारीकियों को सीखने का जो अवसर प्राप्त हुआ वो अमूल्य व अवर्णनीय है, ऐसे अवसर व श्रेष्ठ मार्गदर्शन ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण व उसमें निखार लाते है।
बजरंग दल का कार्य समाज में ठीक वैसा ही है जो भगवान श्रीराम जी के लिए हनुमानजी ने किया, हमारा चिर सनातन हिन्दू समाज ही हमारे श्रीराम है उनके लिए हनुमानजी के आदर्शों को अपनाकर ही हम कुशल कार्यकर्ता बन सकते है और यह काम बजरंगी नित्य जीवन में करते है।
बजरंगी की कार्यकुशलता व संगठन दक्षता का परिचय श्री हनुमान चालीसा की इस चौपाई से स्पष्ट हो जाता है-
"विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।"
यही सच्चे बजरंगी का पूर्ण परिचय है।
बजरंग दल ने अपने उद्भव के 38 वर्षों के कार्यकाल में समाज की सेवा, सुरक्षा व संस्कार के ध्येय वाक्य को इतना सार्थक किया है कि वो शब्दों में अवर्णनीय है, चाहे वो धर्म-संस्कृति की रक्षा हो, बहन-बेटी या गौमाता की सुरक्षा का विषय हो, धर्मांतरण विरोध, सामाजिक समरसता निर्माण, आपदा प्रबंधन में सहायता हो, युवा शक्ति को राष्ट्रनिर्माण में आहूत करना हो, शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगारपरक कार्यक्रम चलाने हो, सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करनी हो या फिर समाज में नवजागरण का शंखनाद करना हो बजरंगी हमेशा "रामकाज किन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम" के भाव से ततपर रहता है।
आज देश भर के मीडिया संस्थान, सामाजिक-धार्मिक मंच, राजनीतिक दल सहित हमारे विचारों के विरोधी लोग भी यह मानने लगे है कि बजरंग दल कोई हुल्लड़ बाज टोली नहीं अपितु राष्ट्र व समाज की सेवा में निष्काम भाव से समर्पित युवाओं का एक सुसंस्कृत सभ्य संगठन है।
समाज में बजरंग दल जब सेवा का कार्य करता है तो वह प्रसिद्धि परांगमुख हो कर करता है क्योकि वह जानता है कि यह उसके लिए अपने प्रभु श्रीराम जी का काम है, और वह उसी काम हेतु बना है। समाज भी तब यहीं कहता है कि "कौन नही जानत है जग में, कपि संकट मोचन नाम तिहारो..."
समाज को सुरक्षा देने हेतु जब बजरंग दल मैदान में उतरता है तो वह पवनपुत्र के बल को धारण करता हुआ अपने विराट स्वरूप में प्रकट होकर "तीनहुँ लोक हांक ते कांपे..." को चरितार्थ करता है। और वही बजरंगी जब युवाओं में संस्कार भाव को जागृत करने निकलता है तो विनम्र भाव से अपने मूल संगठन विहिप व संघ की महानता व मार्गदर्शन को अंगीकार करता हुआ समाज से कहता है हम कुछ नहीं करते जो भी हो रहा है उसमें प्रेरणा तत्व हमारा मुख्य संगठन है ठीक वैसे ही जैसे श्री हनुमानजी माता जानकीजी को कहते है "रामदूत मैं मातु जानकी, सत्य शपथ मोहे करुणानिधान की"।
यह है बजरंग दल का उसके समर्पित हनुमत स्वरूप कार्यकर्ताओं का चरित्र, और यही वो शक्ति है कि आज बजरंग दल कोटिशः हिन्दू हृदय में देवता समान प्रतिष्ठित है।
मुझे गर्व है कि दो दशक (20 वर्षों) की इस महान तीर्थयात्रा में बजरंगी के रूप में मुझे "सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा" के गूढ़ मंत्र को जानकर काम करने का सुअवसर मिला।
आगे भी संगठन कार्य में जीवन भर बजरंगी भाव ही हृदयस्थ रहेगा।
2001 से 2021 तक दो दशकों की इस यात्रा के समस्त तटबंधों, तीर्थों पड़ावों को मेरा सादर वन्दन।
आज बजरंग दल स्थापना दिवस पर सभी को मङ्गलमय शुभकामनाएं।
जय श्री राम।
@ नरेश बोहरा "नरेन्द्र"
प्रान्त सह प्रचार प्रसार प्रमुख
विहिप-जोधपुर
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