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लखीमपुर खीरी प्रकरण और राजनीतिक वहशीपन

 #लखीमपुर_खीरी प्रकरण

भेड़ियों के झुण्ड लखीमपुर खीरी जाने को बेताब है, जा रहे है, लाशों को नोच रहे है, लोथड़े बिखेर रहे है जिससे कि दुर्गंध सर्वत्र फैले...वातावरण दूषित हो और इनकी गन्दी सोच, गंदे इरादे, इनके राष्ट्रविरोधी एजेंडे सफल हो। 


लखीमपुर में जो कुछ हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है, परन्तु उसके पीछे के कड़वे सच पर कोई जाना नही चाहता, किसान के नाम पर उग्रवादी तत्वों की विभत्स गतिविधियों पर कोई नही बोल रहा। भिंडरावाले के पोस्टर लगे कपड़े पहने खलिस्तानियों पर कोई अपनी बात नही रखेगा.., दादा-दादा करते जान बचाने की भीख मांगते वाहन चालक से अपनी इच्छानुसार कुछ भी कहलवाना चाहने वाले अतिवादी और उनके द्वारा लाठियों से पीट-पीटकर मार दिए गए ड्राइवर, पत्रकार व अन्य पर कोई जबान नही खोलता....उनकी नजर में यह लिंचिंग नही है, न्याय है। क्योंकि मरने वाले मुसलमान नही थे। 


जाना क्यों है...? क्या हमदर्दी दिखाने की इतनी जल्दी है..? ये लोग केरल, बंगाल, कश्मीर क्यों नही जाते..? ये राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि गैर भाजपाई सत्ता वाले राज्यों में जाकर दीन दुखियों के आँसू क्यों नही पोछते....? उत्तर एक शब्द में यह है कि वहाँ उन्हें वोट नही लेने है......,वहाँ अपनी सरकार में सब अच्छा है क्योकि ये तो मसीहाओं की सत्ता जो ठहरी..। 


इनकी इस अतितीव्र उत्कंठा, हाहाकार, रुदन व प्रलाप का लक्ष्य कौन है.....? भाजपा ......!!! जी नहीं, भाजपा इनका लक्ष्य नही है क्योंकि ये भाजपा को तो कभी भी, कैसे भी हरा सकते है, कई राज्यों में हरा भी देते है, 2004 में अटल जी को आलू-प्याज जैसे गौण मुद्दों पर सत्ताच्युत कर दिया था.., 2009 में भी वापसी नही होने दी क्योंकि इनके पास सब हथियार थे जो काम में लिए।

इनका लक्ष्य सिर्फ नरेन्द्र मोदीजी, योगी आदित्यनाथ जी, अमित शाह जी और कुछ मुट्ठीभर वो हस्तियां है जिन्होंने इनकी सत्ता की जाजम हमेशा के लिए उठा दी है, इन्हें बेरोजगार कर दिया है, इनकी अराष्ट्रीय गतिविधियों पर लगाम कस दी है, इनके देशी-विदेशी सहयोगियों की कमर तोड़ दी है, इनके बौद्धिक आतंकवाद के गढ़ ध्वस्त कर दिए है, इनकी काली कमाई को रोक दिया है, इनके वर्षों के कुकर्म उजागर कर दिए है जिससे नई पीढ़ी इनसे घोर नफरत करने लगी है, वो इनको सवालों से घेरती है।

भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जगाने वाले राजनीतिक लोग, सामाजिक संगठनों के शीर्ष इनके निशाने पर है और उन्हें परास्त करने की यह सारी कोशिशें है। यह छटपटाहट, बिल्बिलाहत का परिणाम है, यह अंतहीन नफरत है जो उजागर हो रही है। 


जा कौन रहा है देखिए और विश्लेषण कीजिए, एक राष्ट्रीय विदूषक जिस पर उसकी ही पार्टी के लोग अंगुलियां उठातें है, जो बूढ़ी हो चुकी कॉंग्रेस का क्रियाकर्म करके ही मानेगा, एक और वंशवादी राजनीति की उपज जिसके पति पर किसानों की जमीनें धोखे से हड़पने का मामला चल रहा है, जो बिना किसी संवेधानिक पद के वर्षों तक सरकारी सुविधाओं का भोग करती आ रही थी अब रोक दी गई है, उसकी राजनीतिक योग्यता मात्र यह है कि उसकी नाक उसकी दादी से मिलती है। एक कमजोर क्रिप्टो ईसाई मुख्यमंत्री जो विदूषक की फटी जेब से खोटी चवन्नी की तरह निकला और अल्पकाल हेतु अत्यंत संवेदनशील सीमावर्ती राज्य का नेतृत्व कर रहा है, उसने खीरी में 50 लाख प्रति परिवार देकर वोट खरीदने की कोशिश की है।  एक मुख्यमंत्री जिसके राज्य में निरन्तर नक्सलियों द्वारा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जहाँ किसान बेहाल है, ताजा ही उसके राज्य के कवर्धा में अशांति फैली है, वहाँ सशस्त्र बल तैनात है, इंटरनेट तक बन्द है, जिसके पिता ने ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा भेजने की धमकी दी तथा जेल गया, वो लखीमपुर में हताहत ब्राह्मण बन्धुओं को सांत्वना के साथ 50-50 लाख देगा। 


राजस्थान का पप्पू पायलट अपनी हजूरियत दर्शाने हेतु गिरफ्तार हो रहे है, जो कर कुछ नही सकते पर मुख्यमंत्री से नीचे सोचते ही नही....। गहलोत जी जो राजस्थान में लचर कानून व्यवस्था के विषय पर कबूतर हो जाते है, जिन्हें पैरों में जलती आग नही दिखती पर उत्तरप्रदेश पर नियमित कॉलम लिखते रहते है, जो मुख्यमंत्री कम केंद्र में विपक्ष के नेता ज्यादा नजर आते है, जो पिछले 8 माह से बापर्दा रह कर गांधी हो रहे है ने अपने खास डोटासरा को भेजा है, सरकारी ईंधन से चलने वाली दर्जनों गाड़िया देकर..... वो डोटासरा जो लाखों युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने का दोषी है। 

पंजाब वाले 10 हजार गाड़िया लेकर जाएंगे....सरकार के धन को बर्बाद करना है बस कैसे भी करो.... वंशवाद की गुलामी खून में जो ठहरी....। 


कोरोना काल में हजारों उत्तरप्रदेश-बिहार के नागरिकों को महाराष्ट्र से दर-बदर करने वाले, अपने पिता के उज्जवल नाम को कलंकित करने वाले, पालघर में सनातनी सन्यासियों की विभत्स निर्मम हत्या पर कुछ भी न करने वाले नकारा उद्धव .....(ठाकरे तो लिखने की भी इच्छा नही होती) एक दिन महाराष्ट्र बन्द रखने का स्यापा कर ही रहे है, साथ ही विधानसभा में किसी अन्य प्रदेश की सरकार के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित करने का असंवेधानिक काम करके घुटना टेक चाकर प्रवृति को सिद्ध भी कर दिया। 


आपिये, वामी, तृणमूल आदि भी इन्ही की अवैध संताने है उन्हें तो अपने जैविक बाप की आज्ञा माननी ही है साथ ही अपने अंतराष्ट्रीय आकाओं के मनोरथ भी तो पूर्ण करने है वो तो जाएंगे ही......। 


सोचना किसे है......सोचना देश की जागृत राष्ट्रवादी जनता को है कि वो क्या निर्णय करेगी क्योकि यह उपरोक्त सारी कसरत आगामी 2022 में उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में योगीजी को हटाने फिर आगे उसी रास्ते पर चलकर 2024 में मोदीजी को सत्ता व देश के राष्ट्रीय परिदृश्य से च्युत करने के विध्वंशकारी षड्यंत्र का एक हिस्सा मात्र है, इसमें इनके साथ बड़ी-बड़ी वैश्विक ताकते जुटी हुई है जो भारत और भारतीयता के बढ़ते उत्कर्ष से हताश, परेशान और मरणासन्न स्थिति में है। 


✒️©️ नरेश बोहरा "नरेन्द्र" 

         नाड़ोल (राजस्थान)

Comments

  1. सार्थक और सत्य लिखा है आपका यह लेख संसद के गलियारों तक गूंजना चाहिए

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    Replies
    1. जब आप उस गलियारे की शोभा बढ़ाओ तब गुंजाना...👍

      Delete
  2. वह वह नहीं कहते जो सब कहते हैं वह जो भी कहते हैं गजब कहते हैं

    नाडोल नरेश को प्रणाम
    यशोदा

    ReplyDelete

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