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सेवा और त्याग की प्रतिमूर्ति : राजमाता सिंधिया

आज परम् आदरणीय राजमाता #विजयाराजे सिंधिया जी की #जयंती है। राजमाता जी भारत के सबसे सम्पन्न #राजवंश की आप #महारानी थी, भौतिक रूप से महारानी मगर कार्यों, विचारों व्यवहार से बिल्कुल निर्लिप्त #सन्यासी, स्वतंत्रता के पश्चात लोकतांत्रिक युग में आपने दीन दुखियों की सेवा हेतु #राजनीतिक जीवन प्रारम्भ किया लेकिन जिस दल (कांग्रेस) पर जनता का सर्वाधिक विश्वास था जब वो ही उन्हें छल रहा हो तो आपका मन वहाँ कैसे रमे? स्वतंत्र पार्टी और उस दौर में विकल्प के रूप में उभरे नए नवेले #जनसंघ को आपने थामा, उसे खड़ा किया, उसके अंदर कार्यरत काम करने वाले पदाधिकारियों जो जीवन के समस्त सुखों को ठोकर मारकर, केवल और केवल राष्ट्रासाधना हेतु, #भारत माता की जय हेतु सङ्घर्ष कर रहे थे, उन्हें सम्बल दिया, सशक्त किया और कठिनाइयों से लड़कर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। पता था कि इसके परिणामस्वरूप तत्कालीन सत्ता उन्हें प्रताड़ित करेगी परन्तु वे झुकी नही, एक ही समय में वो 2 भिन्न दलों से विजयी भी हुई। आदरणीय #दीनदयाल जी, #अटलबिहारी जी, #आडवाणी जी, नानाजी देशमुख जी भंडारी जी और उन अनेकों कार्यकर्ताओं की माता , बहन साथी बनकर उन्हें तन, मन, धन से पूर्ण सहयोग व संसाधन उपलब्ध करवाकर आपने जनसंघ के #दीपक को भयंकर तूफानों  में प्रज्वलित रखने का महान कार्य किया। #आपातकाल के भीषण अत्याचारों को झेलकर आह तक नही करने वाली राजमाता जी एक फौलादी चट्टान थी जिसे #इन्दिरा_गांधी हिला न सकी। सत्ता का मोह छोड़ आपने सङ्गठन व हिन्दू समाज के जागरण में लगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक #संघ और #विश्व_हिन्दू_परिषद के कार्यों का पूर्ण समर्थन व सहयोग किया। विहिप से आप प्रत्यक्ष जुड़कर केंद्रीय उपाध्यक्ष के नाते श्री #रामजन्म_भूमि #आंदोलन में महती भूमिका निभाई, श्रध्देय #अशोक #सिंघल जी के साथ आपने कदम मिलाकर कार्य किया तथा विहिप को सभी प्रकार का सहयोग देकर उदाहरण प्रस्तुत किया। #भारतीयजनतापार्टी के गठन तथा सांस्कृतिक #राष्ट्रवाद के उत्थान का सङ्कल्प जो सभी ने 1980 में लिया था उसको पूर्ण करने व #कमल खिलाने हेतु आपने शेष जीवन समर्पित किया। निजी जीवन में अनेकों व्यवधान, सङ्घर्ष, पीड़ा, देखकर भी कभी उसकी आँच अपने सार्वजनिक जीवन मे प्रकट नही होने दी। राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी का सम्पूर्ण जीवन ऋषितुल्य व प्रेरणादायी रहा है। #राजनीति में #महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़े उसके लिए आप सदैव प्रयत्नशील रही। आज जिन्हें राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ना है उन्हें #राजमाता जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। #सिंधिया राजपरिवार के पुरखों की कुछ #ऐतिहासिक भूलों को आपने अपने सात्विक जीवन, व पुण्यकर्मों से धोने का पूर्ण प्रयास किया। 

आज उनकी जयंती पर सादर नमन करता हूँ तथा ईश्वर से उनके परमधाम में वास की प्रार्थना करता हूँ।

✍️ नरेश बोहरा " नरेन्द्र"

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