वैदिक ऋषियों, सन्तों, शूरवीरों और गुरुओं की पवित्र भूमि पंचनद प्रदेश #पंजाब एक बार पुनः राजनैतिक संकट में है और यह संकट आगे बढ़कर एक भीषण आपदा का रूप लेगा इसमें कोई सन्देह नही है।
आज पंजाब ड्रग्स माफियाओं की गिरफ्त में फंस चुका है, युवा पीढ़ी अब गुरु साहिबानों के खालसा नही रहे वो हिप्पी बन रहे है। विदेशी ताकतें पुरजोर तरीके से नशे की खेप के साथ-साथ विखंडनकारी सोच भी पंजाब के लोगों के मन में पहुंचा चुकी है। खलिस्तान का प्रोपगंडा फिर से आजमाया जा रहा है, किसान आंदोलन इसी का परिणाम है।
ईसाई मिशनरियों द्वारा पंजाब के गरीब और सीधे-सादे लोगों खासकर वंचित वर्ग के हिन्दू-सिखों को गीता और गुरुवाणी से विमुख करने का षड्यंत्र वर्षों से चल ही रहा है और वे सफल भी हो रहे है, उन्हें सत्ता के शीर्षस्थ लोगों का आशीर्वाद प्राप्त है क्योंकि पंजाब में वेटिकन के प्रतिनिधियों की सरकार है। जयभीम-जयमिम के सरपरस्त भी जी जान से हिन्दू-सिख एकता को तोड़ने में लगे हुए हैं।
राजनीतिक स्तर पर विभिन्न दलों की नूराकुश्ती, अकालियों द्वारा केंद्र की भाजपा सरकार से समर्थन वापसी, आम आदमी पार्टी की वामपंथियों की तर्ज पर विभाजन कारी राजनीति तथा कॉंग्रेस में चिर पतित नवजोत सिंह सिद्धू जैसे भांड को गांधी परिवार द्वारा वरदहस्त देकर अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री को कमजोर करने की लगातार साजिशों ने एक गम्भीर संकटपूर्ण स्थिति निर्माण की जिसका भुगतान सम्पूर्ण राष्ट्र को करना पड़ेगा। इन सबके बीच भाजपा का वहाँ कोई विशेष जनाधार व संख्याबल न होना एक मजबूत विपक्ष की कमी दर्शाता है।
SGPC आरम्भ से ही संघ व भाजपा का विरोध करती आई है क्योंकि इस शक्तिशाली सिख संस्था पर वहाँ के जट्ट सिखों का अधिकार है और पंजाब की सम्पूर्ण राजनीति भी इन जट्ट सिखों जिनका वोट मात्र 18% है के इर्दगिर्द ही घूमती है, शेष सिख-हिन्दू जो बड़ा वोटबैंक है को इन मौकापरस्त राजनीतिक दलों, और मीडिया वर्ग द्वारा हिन्दू-सिख-दलित अलग-अलग गिनाकर उनकी शक्ति व सामर्थ्य को दीन-हीन बना दिया है। ये 18% ही पंजाब के राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक विषयों का निर्णय करते है, सत्ता व धार्मिक प्रतिष्ठानों की चाबी भी इनके ही हाथ में है। इन्हें दूसरों के अधिकारों की कोई चिंता नही है।
नवजोत सिंह सिद्धू की कारगुजारियों से कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार लगातार अस्थिर हो रही थी, कैप्टन भले ही कांग्रेसी हो परन्तु उनके अंदर एक सैनिक बसता है वो गुरुपुत्र होने का गौरव रखते है तथा उन्हें यह आभास भी है कि पाकिस्तान की सीमा से सटे राज्य में सत्ता कैसे चलाई जाती है। उन्होंने समय-समय पर खलिस्तानियों के मंसूबो पर पानी फेरा है, नवजोत का इमरान और बाजवा से सम्बन्ध प्रान्त और देश के लिए कितने खतरनाक है यह भी वो जानते है।
केंद्र के साथ भी कैप्टन ने मैत्रीपूर्ण सम्बंध रखे जिससे सोनिया एंड पार्टी नाराज चल ही रही थी, अमरिंदर सिंह जननेता है उन्होंने पिछले चुनावों में अपने दम पर सत्ता में वापसी की थी तथा दस जनपथ पर कभी घुटने नही मोड़े, इन सब कारणों से उन्हें मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने हेतु मजबूर किया गया।
सियासत की इन चालों से कुछ लोगों का भला हो सकता है परन्तु गांधी परिवार के इशारों पर चलने वाला तथा नवजोत सिद्धू का डमी मुख्यमंत्री किस तरह परिस्थितियों को सम्भालेगा यह यक्ष प्रश्न है।
✒️©️ नरेश बोहरा "नरेन्द्र"
नाड़ोल - राजस्थान
सटीक लिखा भाईसाहब ....
ReplyDeleteकल ही एक रिपोर्ट में देखा कि पंजाब के किसानों की आय करीब 26150 रुपये है जो पूरे भारत मे सबसे ज्यादा है सबसे कम झारखंड या शायद बिहार होगा
लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है कि किसान बिल के विरोधी सबसे ज्यादा पंजाब से है यह एक बड़ी चाल थी जिसमे यह सफल हुए हालांकि मोदी सरकार द्वारा कानून वापसी ने एक बड़े षड्यंत्र को नाकाम कर दिया
लेकिन पंजाब अब इस मोड़ पर है जहाँ वामपंथी ताकते मजूबत है जो आने वाले समय मे पंजाब को तोड़ने के अलावा कुछ नही करेगी
सत्ता की शक्ति और जन जागरूकता ही विकल्प है नही फिर जैसे आजादी के समय बंगाल जला वैसे आने वाले समय मे पंजाब जलेगा
सही कहा ललित जी
Delete