#विभाजन_विभीषिका_स्मृति_दिवस
#अखण्ड_भारत_स्मृति_दिवस
1947 में भारतवर्ष का विभाजन विश्व इतिहास की सबसे रक्तरंजित घटना थी। मुगलों के आगमन के समय जो भारत 1 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तारित था वो 14 अगस्त 1947 के त्रासदीपूर्ण, अनियोजित, अस्वीकार्य दो राष्ट्र में बदलने के गोरे और काले अंग्रेजों के कपटपूर्ण निर्णय के बाद मात्र 33 हजार वर्ग किलोमीटर का इंडिया मात्र रह गया।
जिसे गाँधी जी ने 'अपनी लाश पर होना कहा था...', जिसे नेहरू ने अपनी सत्ता भोग की लालसा के चलते 'नियति से मुलाकात कहा था' जिसे जिन्ना ने 'मात्र शुरूआत है...' कहकर भविष्य की योजना बता दी थी और जिसे हिंगलाज से ढाकेश्वरी तक के भक्तों ने, हिन्द की संतानों ने कहर की तरह झेला था..." उस जेहादी योजना की सफल परिणीति को लॉर्ड माउंटबेटन के ख़ुशामदिदो ने हमारी आगामी पीढ़ियों से छुपाने का षड्यंत्र भी आजादी के पश्चात रचा।
अपने पाकिस्तान न जा पाने की मजबूरी को जिस मौलाना आजाद ने बार-बार भुनाकर वाहवाहियां लूटी और सत्ता भोगी उसी ने नेहरू और वामपंथियों के इशारों पर भारत के शिक्षा मंत्री रहते किताबों, पाठ्यक्रमों और इतिहास की तवारीख़ से मिटाने का घोर पाप किया.....।
यदि इसे नही मिटाते...तो हमारी नई पीढ़ी कॉंग्रेस के उन तत्कालीन नेताओं की घुटना टेक राजनीति को पहचान जाती..., वो उन चेहरों से नकाब हटा देती जिन्होंने 1929 के लाहौर अधिवेशन में विभाजन की मांग को "मूर्खो का स्वर्ग" कहा था, जिन्होंने रावी के पवित्र जल को हाथ में लेकर पूर्ण स्वराज की मांग की थी, जिन्होने बार-बार जिन्ना की धमकियों को नजरअंदाज किया, मुस्लिम लीग और जेहादी मानसिकता के मुस्लिम नेताओं को राष्ट्रवादियों की अपेक्षा अधिक तरजीह दी, जिन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री सुहरावर्दी की हिंदुओ के कत्ल की योजना और गुंडागर्दी पर आँखे मुँद ली थी।
यही नही मिटाते...तो हम यह जान जाते की किस तरह देशभक्त वल्लभभाई पटेल और राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक श्री गुरुजी व वीर सावरकर जी की चेतावनियों पर ध्यान नही दिया गया।
विभाजन में किसने क्या खोया यह अवर्णनीय है...कागज से ज्यादा तो आँखे भर जाती है, हिन्दू-सिख गाजर मूली की तरह काटे गए.., बहन बेटियाँ जेहादी और लड़ के लेंगे पाकिस्तान के नारा परस्त भेड़ियों की शिकार हुई....। कितने ही परिवारों की एक पूरी श्रंखला नष्ट हो गई....। कितने ही समुदाय बिखर और बिछड़ गए....। सिंधु, रावी, व्यास , सतलज, बंट गई, ढाका की मलमल और लाहौर के सरसों के खेत बिछड़ गए...।
यहूदी भाई कभी अपनी मातृभूमि, मातृभाषा और त्रासदी नही भूले न उन्हें उनके पथप्रदर्शक नेताओं ने भूलने दिया... परिणामस्वरूप 1000 वर्षों के संघर्ष केबाद भी उनका हर जुबां का पीढ़ी दर पीढ़ी चला ध्येय वाक्य, सङ्कल्प और स्वप्न " अगले वर्ष यरूशलेम में मिलेंगे" सफल हुआ। जर्मनी एक हुआ.….रसियन समझ रहे है।
संघ की शाखाओं में लगने वाला "भारत माता की जय" का उद्घोष, स्वयंसेवकों, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाने वाला #अखण्ड_भारत_स्मृति_दिवस इसी दिशा का एक प्रयास है कि हम भी नही भूले हमारा भक्त प्रह्लाद मुल्तान का था, रावलपिंडी और कराँची हमारे है, ढाका हमारा है, गंधार और आर्यान (ईरान) ब्रह्मदेश हमारा है।
प्रसन्नता का विषय है कि केन्द्रनीत श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रतिवर्ष 14 अगस्त को भविष्य की पीढ़ी की जानकारी हेतु #विभाजन_विभीषिका_स्मृति_दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेकर इसका गजट नोटिफिकेशन जारी किया है।
प्रधानमंत्री श्री मोदीजी का कहना है की " देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नही जा सकता....." ।
सच में भुलाया नही जा सकता और यह याद रखना ही हमारे पुनः अखण्ड भारत निर्माण के पवित्र दृढ़ संकल्प व लक्ष्य की पूर्णाहुति का माध्यम बनेगा।
महर्षि अरविंद ने कहा था "यह विभाजन अप्राकृतिक है, इसे एक दिन समाप्त होना ही होगा"।
श्रद्धेय अटलबिहारी वाजपेयी जी रचित कविता की यह पंक्ति सदैव हमें भारत को पुनः अखण्डित करने की प्रेरणा देती है .....
"दिन दूर नहीं खंडित भारत को
पुन: अखंड बनाएँगे।
गिलगित से गारो पर्वत तक
आज़ादी पर्व मनाएँगे॥
उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से
कमर कसें बलिदान करें।
जो पाया उसमें खो न जाएँ,
जो खोया उसका ध्यान करें॥"
जो भरतवंशी विभाजन त्रासदी और स्वातन्त्र्य संघर्ष में बलिदान हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि प्रदान करते हुए आप सभी को अपनी तरफ से आजादी_के_अमृत_महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
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©️ नरेश बोहरा 'नरेन्द्र'
प्रान्त सह प्रचार प्रमुख जोधपुर (राजस्थान)
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ReplyDeleteदर्दनाक कहानी भारतवर्ष की 😢😢
ReplyDeleteबहुत ही सारगर्भित लेख जो आज भारत के युवाओं को अवश्य पढ़ना चाहिए और अखंड भारत के लिए आज से ही संकल्प लेना चाहिए🙏🙏🙏🙏
भारत के अध्याय के सबसे दर्दनाक पृष्ठ के रूप में अंकित है यह विभीषिका ।आपका आभार इतना सही चित्रण किया
ReplyDelete🚩🚩🚩
ReplyDeleteजय श्री राम भाई साहब
ReplyDeleteबहुत ही सारगर्भित लेख जो आज भारत के युवाओं को अवश्य पढ़ना चाहिए और अखंड भारत के लिए आज से ही संकल्प लेना चाहिए🙏🙏🙏🙏