राजस्थान में समस्याएं गम्भीर है, शासन मौन है सरकार खुद अराजकतावादी लोगों को बढ़ावा दे रही है। देशद्रोही, विभाजनकारी, अराष्ट्रीय गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली ताकते फल फूल रही है, सत्ता का उन्हें प्रत्यक्ष सह्योग मिल रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं शुतुरमुर्ग की तरह मुँह रेत में दबाकर तूफान को गुजरने देना चाहते है और उनकी पुलिस व प्रशासन अपने आकाओं के दबाव में चल रही है।
इन दिनों राजस्थान विखण्डन वादी तत्वों की प्रयोगशाला बना हुआ है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण जयपुर के आमागढ़ की घटना है, भारत की महानतम वीर जातियों में शुमार मीणा समाज के गौरवशाली इतिहास का साक्षी आमागढ़ जयपुर के पास एक ऐतिहासिक किला व धरोहर है जिसमें शिव दरबार का मंदिर है, विगत दिनों वहां मन्दिर में तोड़फोड़ हुई तथा इस विषय पर समस्त हिन्दू समाज मे जनाक्रोश हुआ व बाद में वहाँ सर्वसमाज ने विधिवत एक भगवा ध्वज लगाया।
सामाजिक एकता व समरसता के इस वातावरण को विरोधी तत्व पचा नही पाए तथा वर्षों से भारत के महान जनजातिय बन्धुओं, वनवासी भाइयों को शेष हिन्दू समाज से तोड़ने उन्हें सनातन संस्कृति से अलग करने के अभियान में लगी ईसाई मिशनरियों, चर्च की ताकतों ने कुचक्र रचकर कुछ दिनों पूर्व अपने मोहरों के माध्यम से वो भगवा ध्वज हटवाया, न केवल हटवाया बल्कि उसका सार्वजनिक अपमान भी किया और इसका मोहरा बने कॉंग्रेस समर्थित विधायक रामकेश मीणा, नाम रामकेश और खुले आम कह कर गए कि यह भगवा ध्वज हमारा नही है यह आदिवासी संस्कृति का प्रतीक नही है, हम आदिवासी हिन्दू नही है....।
इससे पूर्व कुछ महीने पहले राजस्थान विधानसभा में कॉंग्रेस के विधायक गणेश घोघरा ने भी यही कहा " हम आदिवासी हिन्दू नही है, यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वाले हमें जबर्दस्ती हिन्दू कहते है..." प्रतापगढ़ विधायक रामलाल मीणा भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहते है कि आदिवासियों का सनातन धर्म व हिन्दू संस्कृति से कोई लेना देना नही है।
सरकार को समर्थन दे रही भारत ट्राइबल पार्टी के विचार भी कुछ ऐसे ही है। इन सब विध्वंसक बयानों व सार्वजनिक वक्तव्यों पर न तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और न कॉंग्रेस सङ्गठन ने कोई प्रतिक्रिया दी, यह उनका उन्हें मौन समर्थन ही है।
बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात में सक्रिय जय जोहार के झंडाबरदार जो ईसाई मिशनरियों व चर्च की प्रदत्त सुविधाओं के दम पर बड़े पैमाने पर इन राज्यों के भोले भाले गरीब वनबन्धुओं के धर्मांतरण में लगे है, उन्हें कुछ सुविधाओं के जाल में फांसकर अपनी हजारों वर्षों की सनातन संस्कृति से दूर कर रहे है वो लोग व संस्थायें अब राजस्थान में सरकार व सत्ताधीशों की शह पर यह कुचक्र रच रही है, उनका सहयोग वोटों के लालची व इन्ही गरीब आदिवासियों के कारण सत्ता तक पहुंचे ये राजनेता प्रत्यक्ष रूप से कर रहे है तथा राष्ट्रविरोधियों का रास्ता सुगम कर रहे है।
नाम रामकेश, गणेश, रामलाल लेकिन सोच विभाजनकारी, खुद को हम हिन्दू नही.... घोषित कर यह सामान्य वनवासी भाइयों का ब्रेन वाश करते है जबकि स्वयं समस्त वो सुविधाएं भोग रहे है जो उन्हें हमारा संविधान हिन्दू होने के नाते आदिवासियों हेतु बनाए गए नियमों के आधार पर देता है।
आमागढ़ की घटना व बाद में एक विधायक जो सदन में अपने क्षेत्र के समस्त मतदाताओं व निवासियों का प्रतिनिधित्व करता है, संविधान की शपथ लेता है वो सरेआम ऐसे देश तोड़ने वाले बयान देता है, बाद में सार्वजनिक प्रदर्शन कर राष्ट्रभक्तों को धमकाता है उस पर हमारी सरकार कोई कार्यवाही नही करती जबकि भगवा ध्वज, भगवान मीन के वँशजो के सम्मान, हिन्दू सनातन संस्कृति के समर्थन में जो आता है उन पर मुकदमे दर्ज किए जाते है। सुदर्शन टीवी चैनल के श्री सुरेश चव्हाणके के ऊपर भी मुकदमे दर्ज हुए है।
संविधान द्वारा हिन्दू होने के कारण प्राप्त आरक्षित सीटों से वनबन्धुओं के हितों की आवाज बनकर चुनाव जीतकर आने वाले यहाँ विधानसभा में खुद को हम हिन्दू नही... का राग अलापकर यह साबित कर देते है कि वो ईसाई मिशनरियों के एजेंट है, उनके पिठु है। यह हमारी विडम्बना है।
मीणा समाज का गौरवशाली इतिहास है तथा उज्जवल कीर्तियुक्त वर्तमान है, प्राचीन काल से ही देश व सनातन धर्म की रक्षार्थ अनेकों बलिदान इन समाज के वीरों ने दिए है। एक वीर बदादूर सेवाभावी व शिक्षा में अग्रणी समाज को ये चंद लोग अपने निहित स्वार्थों हेतु आज कटघरे में लाने पर तुले हुए है इनका सार्वजनिक सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
राज्यसभा सांसद श्री किरोड़ीलाल जी मीणा प्रशंसा व अभिनन्दन के पात्र है जिन्होंने इन समाजकंटकों से समाज को बचाने हेतु अभियान छेड़ा है, उन्होंने साफ कहा है कि मीणा समाज अखण्ड हिन्दू समाज का एक मजबूत व अविभाज्य अंग है, जिन्हें हिन्दू होने पर ऐतराज है वो हिन्दू के नाम पर मिल रहे आरक्षण को भी त्यागे..."। श्री किरोड़ीलाल जी का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन सदैव संघर्षशील रहा है, संघ की शाखा से निकल कर उन्होंने जनता की सेवा का व्रत धरा है वो सर्व समाज की समरसता के पक्षधर है तथा ऐसा उन्होंने समय - समय पर कार्यरूप में प्रकट भी किया है। उन्होंने जनता की सेवार्थ लाठियां भी खाई है, समाज का सही दिशा में नेतृत्व ऐसे लोग ही कर सकते है।
जब से केंद्र में भाजपा सरकार बनी है विदेशी ताकते जो पहले आसानी से यहां अपनी अराजक गतिविधियों को चला सकती थी अब संकट में है उनके सहारे पल रहे देश के गद्दार परजीवी भी पहचाने जा रहे है व उन पर कठोर कार्यवाही भी हो रही है, नतीजन वो येन केन प्रकरेण समाज को बाँटकर देश को कमजोर करने की कोशिशें कर रही है और विभिन्न प्रयोगों द्वारा वो इसे लागू भी कर रही है जैसे पहले अनुसूचित जाति/जनजाति दुर्व्यवहार एक्ट के मामले पर, फिर दलित अत्याचारों के झूठे मामलों को उछालकर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय मामला, मुस्लिमों को भड़काने, गौहत्या विषय, सीएए कानून पर विरोध प्रदर्शन, किसान आंदोलन, महाराष्ट्र में तथाकथित वामपंथी एक्टिविष्तों की गिरफ्तारी, रोहित वेमुला प्रकरण, अब यह किसान आंदोलन जैसे उनके ये प्रयोग निरन्तर असफल हो रहे है तथा देश विरोधी लोग व सङ्गठन बेनकाब हो रहे है, जिनसे इनमें निराशा है।
उक्त ये प्रकरण इसी वामपंथी मिशनरी गठजोड़ की बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसे राजस्थान सरकार का मौन व प्रत्यक्ष सहयोग मिल रहा है। हम सभी के लिए यह सोचनीय विषय है, हमें अपनी सांस्कृतित विरासत, सनातन संस्कृति, परम्पराओं व धार्मिक मूल्यों को मिलजुलकर सुरक्षित रखना होगा तथा एक होकर इन राष्ट्रविरोधियों को मुँह तोड़ जबाव देना होगा तभी हम इनके षडयंत्रों से स्वयं व सम्पूर्ण हिन्दू समाज को बचा सकते है।
विषय अत्यंत गम्भीर व संवेदनशील है तथा इसे बिना आपस मे टकराए सुलझाना ही महती आवश्यकता है, सामाजिक समरसता का निर्माण मिलजुलकर करना होगा तथा सभी को साथ लेकर हमें अपने आदिवासी, वंचित व समाज की मुख्यधारा से कटे भाइयों को इस घोर षड्यंत्र से सुरक्षित निकालना होगा।
भगवान श्री राम जी के अतिप्रिय हमारे वनबन्धु महान ऋषियों की सन्तान तथा हमारे विजयी वीरों के पूर्वज है, जिन्होंने सनातन धर्म की सेवा में जीवन बलिदान किया है, आज हम उन्हें इन विधर्मियों की साजिश से बचाने हेतु आगे आये यही समय की मांग है।
©️✒️ नरेश कुमार बोहरा "नरेन्द्र"
नाड़ोल राजस्थान
सटीक विश्लेषण, आदिवासी समाज को नए हथकंडे अपनाकर अलग करने का प्रयास है राजनैतिक रूप से आदिवासी के नाम पर बनी पार्टीया भी इस तरह के एजेंडों में लगी हुई है चुनाव चिन्ह अलग लेकिन समर्थन कांग्रेस को इसलिए समाज को पता ही नही चल पाता हमारा सरोकार किससे है
ReplyDeleteमेरा तो मत यह कि राजनैतिक चेतना लाने के अलग से आदिवासी पार्टी बने जो न केवल सनातन संस्कृति से आदिवासी जुड़ाव बताये बल्कि उनके हक हुकूक के लिए लड़े
राजस्थान बीजेपी अबतक वहाँ पहुँच ही नही पाई है
एकदम सटिक
ReplyDeleteवनवासियों को सभ्यता विहीन आदिवासी कहने वाले इन क्रिप्टो क्रिश्चियनों को आईना दिखाने की जरूरत हैं |