ऐसे समय में जब इस धरा पर सनातन वैदिक धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से बौद्धों, कापालिकों और उनके समर्थकों ने वेदों, मंदिरों, संस्कृति व परम्पराओं को नष्टभृष्ट करना आरम्भ कर दिया था, राजसत्ता उनके अंधप्रभाव में अपने शास्त्रीय ज्ञान व शस्त्र की धार को कुंद कर चुकी थी, चारों तरफ हाहाकार था, धर्मज्ञ लोग संस्कृति और प्राण बचाने हेतु ईश्वर को पुकार रहे थे, ढाई हजार वर्ष पूर्व दक्षिण भारत के केरल में एक वेदपाठी ब्राह्मण के घर में स्वयं महाकाल ने शिवांश स्वरूप भगवान शंकराचार्य के नाम से जन्म लिया। 7 वर्ष की आयु में सन्यास एवं 32 वर्ष में महाप्रयाण के बीच के कालखण्ड में उन्होंने सम्पूर्ण आर्यभूमि में वैदिक धर्म का पुनरुद्धार व पुनर्प्रतिष्ठा का महान कार्य किया। अपने दिव्य वैदिक ज्ञान के बल पर उन्होंने धर्मच्युत समाज को एक नई दिशा प्रदान की और धर्मविरिधियों को पराजित कर उन्हें पुनः सनातनी बनाया। प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद भगवान शंकराचार्य जी ने जी कार्य सम्पन्न किये उनका वर्णन यह लेखनी और चर्म जिव्हा करने में असमर्थ है। हम वैदिक धर्मावलम्बी आपके सदैव ऋणी रहेंगे। वो सनातन के अक्षय प्रकाश स्तम्भ है, ...
नरेश बोहरा "नरेन्द्र" (नाड़ोल) प्रान्त सह प्रचार प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद जोधपुर प्रान्त (राजस्थान) का अधिकृत ब्लॉग पृष्ठ