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Showing posts from May, 2022

सत्ता मद के विरुद्ध जनसंघर्ष के नायक : भगवान परशुराम जी

वैदिक कालखंड के आर्यावर्त में हमारे ऋषि मुनि क्षत्रियों को राज सत्ता सौंप उन्हें राष्ट्र और जन दोनों के हित में कार्य करने का निर्देश दे कर आत्म निःश्रेयस भाव से वन में निवास करते हुए निरंतर समाज को देने के लिए नित्य नूतन ज्ञान-विज्ञान के अनुसंधान व तप में लीन रहते थे। इसी प्रकार के एक वैज्ञानिक महर्षि जमदग्नि के घर अक्षय तृतीया को बालक राम का जन्म हुआ। माता रेणुका के स्नेह छाँव में पोषित तथा परम् विद्वान पिता द्वारा प्रदत्त शिक्षा-दीक्षा से पल्लवित युवा राम कठोर तप हेतु हिमालय की गोद में चले गये, इधर सत्ता मद के अहंकार से ग्रसित राजाओं ने आम जनता सहित ऋषि-मुनियों को प्रताड़ित करना आरम्भ कर दिया।  ऐसे शासन में धर्म-कर्म, ज्ञान- विज्ञान के अनुसंधान में बाधाएं उतपन्न होने लगी, सनातन के आधार तत्व गाय, गंगा, गायत्री सभी असुरक्षित अनुभव करने लगे, मदांध राजसत्ता ऋषि गणों के अपमान और शील हरण पर उतर आई। महर्षि जमदग्नि ने नेतृत्व कर कठोर प्रतिकार किया परन्तु राजसी सत्ता ने उनके प्राणों की बली ले ली।  माता रेणुका, कामधेनु गौमाता की चीत्कार और आम जन की करूंण पुकार सुनकर विचलित राम तपस्या ...

पंजाब : अतीत और वर्तमान

भरतखण्ड की ऐसी पवित्र भूमि जहाँ विश्व को दिव्य ज्ञान प्रदान करने वाली सनातन वैदिक सभ्यता का प्रादुर्भाव हुआ, जहाँ ईश्वरीय ज्ञान की प्रतीक वैदिक ऋचाओं का आत्म साक्षात्कार सरस्वती पुत्रों ने किया और वेद जैसे महान ग्रन्थों की भौतिक रचना उन सारस्वतयो ने की, वो ही सारस्तव्य प्रदेश जिसे रामायण में कैकय, महाभारत में सप्तसिन्धु, (सात नदियों की भूमि सिंधु और सरस्वती सहित अन्य नीचे वर्णित 5 नाम), ततपश्चात पंचनद  प्रदेश कहा गया क्योकि यह पाँच नदियों का समाहार प्रदेश है। ये नदियाँ यहाँ की प्रधान पाँच नदियाँ हैं, जो सिन्धु नदी में मिल जाती हैं। शतद्रु (सतलुज), वितस्ता (व्यास), इरावती (रावी), चंद्रभागा (चिनाब) और विशप्ता (झेलम) इसी कारण इसे कालांतर में फारसी शब्द पंजाब (पंज+आब) की उपमा दी गई। यहाँ के लोग युगों से शास्त्र और शस्त्र के धनी रहे, यहाँ की धरती ने खेतों में धान तथा रणभूमि में अपने शीश बोए, यहाँ त्याग और बलिदान ही जीवन का आदर्श रहा, इस पवित्र धरा को जिसे 1947 में दो स्वतंत्र देशों की सीमाओं में बांट दिया पर नाम, भाषा, संस्कृति और परम्पराएं बांटना आसान नही रहा वो ही पंजा...