प्रेम (आज का विषय) कृपया संजीदगी से पढ़े। प्रेम सजीव प्राणियों का एक प्रमुख गुण है, इसके प्रकटीकरण के प्रकार अलग हो सकते है। मनुष्य का अन्य प्राणियों तथा ईश्वर के प्रति प्रेम भी एक सहज प्रक्रिया है। हम बात स्त्री पुरूष के मध्य प्रेम की करेंगे। समस्त जीवों में विपरीत लिंगी आकर्षण देह की एक सामान्य गतिविधि है, जो निश्चित शारिरीक विकास के बाद स्वत् प्रकट होता है, किसी का सानिध्य, उसके गुणों को देखना, बुद्धि, बल, कोई विशिष्ट योग्यता, रूप रंग आदि बातों को पसन्द करते करते एक स्वाभाविक आकर्षण पैदा होता है जो स्नेह,मित्रता, प्रेम में परिवर्तित होता है। भारतीय जन जीवन, शास्त्र , परम्परा, साहित्य, काव्य, लोकगीतों और संस्कारों में यह एक अभिन्न अंग के रूप में समाहित है। भक्त शिरोमणि रैदास जी कहते है - रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय। प्रेम न मुख खोलै कभऊँ, नैन देत हैं रोय॥ रैदास कहते हैं कि प्रेम कोशिश करने पर भी छिप नहीं पाता, वह प्रकट हो ही जाता है। प्रेम का बखान वाणी द्वारा नहीं हो सकता। प्रेम को तो आँखों से निकले हुए आँसू ही व्यक्त करते हैं। दुर्भाग्य आज का यह है कि पाश्चात्य...
नरेश बोहरा "नरेन्द्र" (नाड़ोल) प्रान्त सह प्रचार प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद जोधपुर प्रान्त (राजस्थान) का अधिकृत ब्लॉग पृष्ठ