भावुकता मनुष्य का एक सहज स्वाभाविक गुण है, प्रत्येक हृदय में कोमलता, सहृदयता, सहजता, करूणा का भाव समाया होता है जो मन को निश्छल बनाता है, परन्तु अधिकांश व्यक्ति इसे समझ नही पाते, कुछ छुपाते है, कुछ प्रकट ही नही कर सकते और कुछ इन्हें मार देते है। हमारा ज्योतिष शास्त्र चन्द्रमा को मन का कारक ग्रह मानता है तथा वो ही मन को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों ने भी यह सिद्ध किया है कि महासागरों में ज्वार-भाटा चन्द्र की गति पर निर्भर है। मनुष्य होना तभी पूर्णता है कि जब उसका हृदय इन भावों से युक्त हो अन्यथा भावनाओं से विमुख व्यक्ति तो असुर ही कहे गए है जो अत्याचारी और दुष्ट वृति के होते है। संसार का श्रेष्ठ से श्रेष्ठ और शक्तिशाली पुरुष भी हृदय से कोमल हुआ है यह ऐतिहासिक तथ्य है। भावनाओं का प्रकटीकरण आँखों से, शब्दों से ज्यादा होता है। भगवान भी जब पृथ्वी पर लीला करने आये तो पूर्ण लीला तभी सम्भव हुई जब वो भावुक हुए। भगवान श्रीराम वनगमन गए तथा सीताहरण के बाद जो उनकी स्थिति हुई वो पूर्ण रूप से उनकी भावुक हृदयता को प्रकट करती है। बाबा तुलसीदास जी ने मानस के अरण्यकाण्ड में भगवान की इसी भावुकता को बड़ी स...
नरेश बोहरा "नरेन्द्र" (नाड़ोल) प्रान्त सह प्रचार प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद जोधपुर प्रान्त (राजस्थान) का अधिकृत ब्लॉग पृष्ठ